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प्रशासनिक सुधार का प्रस्तावित दस्तावेज

प्रशासनिक क्रान्ति
प्रशासनिक सुधार का प्रस्तावित दस्तावेज

कमलेश कुमार मित्रा वास्ते श्री राम चन्द्र कुशवाहा
म०नं०-१०२@६७ (गीतांजलि फर्नीचर वर्कशाप)
छोटा बघाड़ा (प्रयाग) इलाहाबाद, मो०नं०-९३३५१२२०६४

पत्रांक:-ककम@आंदोलन-प्प्ध् @ दिनांक-०१@०५@२००६

आधुनिक सामंतवाद के विरोध में संविधानिक आंदोलन के द्वितीय चरण की घोषणा दिनांक १६ मई २००५ के द्वितीय पत्र दिनांक १० दिसम्बर २००५ से संबद्ध।

सेवा में,
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आपके कार्यालय के पत्र .............................. दिनांक ................ से सम्बद्ध।
कृपया आवश्यक कार्यवाही@प्रतिक्रिया हेतु@से संबंधित विभाग@निवेदक को निर्देशित@सूचित करने का कष्ट करें।

मान्यवर,
प्रशासनिक सुधार का यह दस्तावेज अखिल भारतीय सेवा के उन लोक सेवकों सहित जनप्रतिनिधियों और शासन को समर्पित है, जिनमें प्रशासनिक सुधार किये जाने की शक्ति और उत्सुकता विद्यमान है।
स्वयं का परिचय -मैं संस्था अभियांत्रिकी एवं ग्रामीण प्रौद्योगिकी संस्थान (आई०ई०आर०टी०) इलाहाबाद के इलेक्ट्रानिक्स विभाग में कम्प्यूटर एवं कम्युनिकेशन लैब का शिक्षक रहा हWूं। संस्थान के स्थापना विभाग के अलोकतांत्रिक कृत एवं अमानवीय प्रबन्धन ने मुझे गैर इन्जिनीरिंग विषय का अध्ययन करने के लिए मजबूर किया। विगत दो वर्षो में मेरे द्वारा किये गये गहन अध्ययन, मंथन और चिन्तन का प्रतिफल आपको प्रस्तुत कर रहा हWूं। मेरा चिन्तन और अध्ययन मेरी मात्र भाषा हिन्दी में रहा है, अन्य भाषा की तुलना में मैं स्वयं को इस भाषा में अधिक सशक्त पाता हWूं। इसलिए प्रशासनिक सुधार के इस प्रथम दस्तावेज को हिन्दी में प्रस्तुत कर रहा हWूं।
प्रस्ताव-१
जनशासन के बित्त पर बिना कोई अतिरिक्त बोझ डाले अधिकारियों@ कर्मचारियों को दिये जाने वाले वेतन ढॉंचे को समाजवादी वेतन ढॉंचे के अनुरूप पारदर्शी एवं मूल्यवद्र्धित बनाया जाना। प्रारूप-१
(अ) वेतन ढॉंचे की पारदर्शिता (वेतन निर्धारण)-किसी कर्मचारी@ अधिकारी@ वरिष्ठ अधिकारी को किसी पद पर कार्य करने के लिए विशिष्ट योग्यता, सामान्य योग्यता, साहस और कार्यकुशलता की आवश्यकता होती है, वह अपने इन मूल्यवान गुणों का पारदर्शी प्रतिफल पाने का अधिकारी है।
(१) समस्त कर्मचारियों एवं अधिकारियों को दिये जाने वाले मूल वेतन को समान किया जाये।
(२) अधिकारी@कर्मचारी जिस पद को धारण करता है, उस पद की योग्यता, "पदयोग्यता भत्ता", को मूल वेतन के प्रतिशत के रूप में पृथक कर जोड़ा जाये।
(३) किसी पद पर कार्य कर रहे कर्मचारी@अधिकारी को समकक्ष कार्य, जो कराये जाते रहे है, के लिए "सामान्य योग्यता भत्ता", को मूल वेतन के प्रतिशत के रूप में पृथक कर जोड़ा जाये।
(४) समान्य कार्य@आवेदन@प्रतिवेदन@शिकायत का शीघ्रता से निस्तारण की कार्य कुशलता, "कार्यकुशलता भत्ता", को मूल वेतन के प्रतिशत के रूप में पृथक कर जोड़ा जाये।
(५) जोखिम पूर्ण कार्य के लिए "साहसिक भत्ता", को मूल वेतन के प्रतिशत के रूप में पृथक कर जोड़ा जाये।
(६) मंहगाई एवं अन्य भत्तों को मूल वेतन के प्रतिशत के रूप में पूर्व की भांति जोड़ा जाये।
(७) अन्य सुविधाओं@भत्तों में कर्मचारियों@अधिकारियों की सामाजिक एवं कार्य स्थल की जिम्मेदारी के अनुरूप समानुपात स्थापित किया जाये।
नोट- उक्त मूल्यवान गुणो का सम्बन्धित पद के साथ क्रेडिट निकाल कर उसके प्रतिशत का निर्धारण किया जाये एवं समस्त पद के प्रारम्भिक कुल देय वेतन में समानुपात स्थापित किया जाये।
(ब) वेतन ढांचे की मूल्य वद्र्धिता (पदोन्नति एवं वेतन वृद्धि)-कोई भी कर्मचारी@अधिकारी अपनी विशिष्ट योग्यता, सामान्य योग्यता, साहस और कार्य कुशलता में उत्तरोत्तर विकास कर अपने विभाग के सर्वोच्च शिखर पर पहुWंचने का अधिकारी है।
(समस्त विभागों के पदोन्नति स्तर एवं चैनल अभी मेरी संज्ञान में नहीं है अध्ययन जारी है.............)
प्रस्ताव-२
जनशासन में जनता के कल्याण हेतु परिसीमा अधिनियम का सामान्य कार्यालयों तक कड़ायी से पालन सुनिश्चित कराया जाना। प्रारूप-२
(८) जनसामान्य से प्राप्त आवेदन@प्रतिवेदन@शिकायत का एक निश्चित समय सीमा के अन्दर निस्तारण, संबंधित कर्मचारी@अधिकारी@वरिष्ठ अधिकारी के कार्य दिवस की गणना के साथ किया जाये।
(९) जनसामान्य से प्राप्त आवेदन@प्रतिवेदन@शिकायत का संबन्धित कर्मचारी@ अधिकारी@वरिष्ठ अधिकारी द्वारा स्वयं प्राप्त करना एवं प्राप्त रसीद को अनिवार्य रूप से दिया जाये।
(१०) डिस्पैच@रिसीट सेक्शन का कम्प्युटरीकृत डाटा वेस प्रणाली के माध्यम से प्राप्त आवेदन@प्रतिवेदन@शिकायत के निस्तारण का लेखा-जोखा रखा जाये।
(११) कम्प्युटरी कृत डाटा वेस प्रणाली द्वारा जनसामान्य से प्राप्त आवेदन@प्रतिवेदन@शिकायत के निस्तारण का नियंत्रण संबंधित विभाग के सर्वोच्च अधिकारी द्वारा स्वयं किया जाये।
(१२) जनसामान्य के आवेदन का शीघ्रता से निस्तारण हेतु रोटीन वर्क को संबंधित सेक्शन के अनुभव प्राप्त लिपिक वर्ग को अधिकृत किया जाये।
(१३) ऐसे आवेदन जिनका विधि में स्पष्ट उल्लेख न हो, के लिपिक द्वारा सम्बन्धित अधिकारी को तुरन्त प्रेषित किया जाये, संबंधित सेक्शन के अधिकारी द्वारा स्वयं निस्तारण किया जाये।
(१४) ऐसे कार्य जिनका विधि में स्पष्ट उल्लेख नहीं है किन्तु पुर्नावृत्ति होती है, के लिए संबंधित अधिकारी द्वारा वरिष्ठ अधिकारी से विधिक रूप में परिवर्तित करा कर लोक किया जाये।
नोट- कम्प्युटरीकृत डाटा बेस प्रणाली से उक्त लेखा-जोखा रखा जाना सम्भव है, विशिष्ट साफ्टवेयर भी डेवलप कराया जा सकता है जो कि प्रतिदिन के ड्यू आवेदन@प्रतिवेदन@शिकायत को "सिंगल की" प्रेस करने से प्रस्तुत कर देगा।
प्रस्ताव-३
परिसीमा अधिनियम के अनुपालन में विफलता पर शास्तियों का अधिरोपित किया जाना।
(१५) यदि कोई कर्मचारी@अधिकारी@वरिष्ठ अधिकारी नियत समय सीमा दस दिन@पन्द्रह दिन@एक माह कार्य दिवस के अन्दर आवेदन@प्रतिवेदन@शिकायत का निस्तारण करने में असफल रहता है तो कार्य कुशलता भत्ता जोकि कई खण्डो में देय है, के एक खण्ड को खो देगा।
(१६) द्वितीय बार असफल रहने पर कार्य कुशलता भत्ता का द्वितीय खण्ड को खो देगा।
(१७) कार्य कुशलता भत्ता के तीन खण्डो को खोने के पश्चात वह, पदयोग्यता भत्ता के एक खण्ड को भी खो देगा।
(१८) अगर कर्मचारी@अधिकारी@वरिष्ठ अधिकारी अपनी कार्य कुशलता को पुन: छ: माह तक बनाये नहीं रख पाता है, तो उसे निचली पद योग्यता वाले पद पर आसीन कर दिया जाये।
परन्तु यदि वह अपनी कार्य कुशलता को छ: माह तक बनाये रखता है तो पदयोग्यता भत्ता के खोये हुये उस खण्ड को पुन: प्राप्त करने का अधिकारी होगा, छ: माह की गणना खण्ड ,खोने की तिथि से की जायेगी। तदानुसार कार्य कुशलता भत्ता को भी क्रमश: पुन: पाने का अधिकारी होगा।
(१९) नये निचले पद पर उस कर्मचारी@अधिकारी@वरिष्ठ अधिकारी की कार्य कुशलता एवं पद योग्यता की गणना नये सिरे से की जाये।
(२०) इस निम्न कोटि के पद पर कार्य करने की कुशलता एवं योग्यता पर भी अयोग्य होने पर पुन: नियम १५ से २० तक की शास्तियों को अधिरोपित किया जायेगा।
(२१) ऐसा कर्मचारी@अधिकारी जो दण्डात्मक (विशिष्ट योग्यता, सामान्य योग्यता, साहसिक एवं कार्य कुशलता) भत्ता पाने के अयोग्य हो गया है अशिष्ट हो जाने पर भारतीय दण्ड संहिता के अधीन जेल जाने का अधिकारी होगा। (भारतीय दण्ड संहिता में व्यापक परिवर्तन की आवश्यकता है अध्ययन कार्य जारी है ................)

प्रस्ताव-४
अन्य शास्तियों का अधिरोपित किया जाना।
(२२) कोई कर्मचारी@अधिकारी@वरिष्ठ अधिकारी जो अपने योग्यता पूर्ण कर्तव्य करने के लिए नियुक्त है। आयोग्यता पूर्ण कार्य करने की शिकायत का दोषी पाया जाता है, योग्यता भत्ता का एक खण्ड खो देगा।
(२३) किसी कर्मचारी@अधिकारी@वरिष्ठ अधिकारी के आयोग्यता पूर्ण कार्य से जिस व्यक्ति की छति होती है पूर्ण भरपायी करने को बाध्य होगा। जिसकी कटौती दण्ड विहीन अन्य भत्तों के बराबर तक किश्तो में की जायेगी।
(२४) योग्यता भत्ता को पुन: प्राप्त करने हेतु पूर्व नियम १८ लागू होगा।
(२५) सामान्य कार्य भत्ता समान्य कार्य किये जाने पर ही देय होेगा। किन्तु सामान्य कार्य को विभागाध्यक्ष@नियुक्ता की अनुमति से ही इन्कार कर सकेगा। सामान्य कार्य में विफलता पर जन छतिपूर्ति के लिए व्यक्तिगत@सामूहिक रूप से बाध्य होगा।
(विभिन्न विभागों में किये जाने वाले सामान्य कार्य का अध्ययन जारी है...)
(२६) साहसिक कार्य भत्ता उनको ही देय होगा जो ऐसे कार्यो के लिए निुयक्त है किन्तु साहसिक कार्यो में विफलता पर साहसिक कार्य भत्ता में कमी, कार्य कुशलता भत्ता की भॉंति कर दी जायेगी।
(विभिन्न विभागों में किये जाने वाले साहसिक कार्य का अध्ययन जारी है..)
प्रस्ताव-५
मानव अधिकार आयोग को अत्यन्त व्यापक बनाया जाना।
(२७) संस्थान@पंचायत@निकाय या कोई अन्य सरकारी@अद्र्धसरकारी@गैर सरकारी विभाग के खर्च पर उसके कम्प्युटरीकृत डिस्पैच@रिसीट सेक्शन का कार्यकर्ता मानव अधिकार आयोग के अधीन कर्मचारी होगा।
(२८) वह आवेदन@प्रतिवेदन@शिकायत के पंजीकरण का उस विभाग में लेखा-जोखा रखेगा।
(२९) अधीनस्थ विभाग के कर्मचारी@अधिकारी@वरिष्ठ अधिकारी द्वारा आवेदन@ प्रतिवेदन@शिकायत की रसीद न देने पर स्वयं उक्त पत्र को प्राप्त कर रसीद देगा और संबंधित विभाग के कर्मचारी@अधिकारी@वरिष्ठ अधिकारी को प्रेषित करेगा।
(३०) संस्थान@पंचायत@निकाय या कोई अन्य सरकारी@अद्र्धसरकारी@गैर सरकारी विभाग के खर्च पर मानव अधिकार आयोग द्वारा नामित पूर्ण कालिक अधिवक्ता उस संस्था@पंचायत@निकाय या अन्य सरकारी@अद्र्धसरकारी@गैर सरकारी विभाग के प्रबन्धन में विधि एवं मानव अधिकार की रक्षा के लिए तैनात रहेगा। प्रबन्धक के दण्डादेश पर उसकी स्वीकृति होना आवश्यक होगा।
प्रस्ताव-६
वादो का शीघ्रता से निस्तारण एवं, समस्त मजिस्ट्रेट को अल्टरनेट डे पर अपने कार्यालय पर नियमित रूप से उपस्थिति कराया जाना।
(३१) जिला मजिस्ट्रेट की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि वह अपने व्यक्तिगत स्टाफ के माध्यम से सभी अधीनस्थ मजिस्ट्रेटो के जनता से भेट के समय में उपस्थिति को बाध्य करे।
(३२) कार्य के शीघ्रता से निस्तारण में अधीनस्थ मजिस्ट्रेट को जिला मजिस्ट्रेट की सभी शक्तियां प्राप्त हो जिनके माध्यम से वह किसी भी कार्यालय के सर्वोच्च@अधीनस्थ अधिकारी को उपस्थिति होने को बाध्य कर सके।
(३३) अधीनस्थ मजिस्ट्रेट के नियत समय सीमा के अन्दर प्रकरण के निस्तारण की रिपोर्ट वादी@प्रतिवादी को उपलब्ध न कराया जाना अधीनस्थ मजिस्ट्रेट की कार्य अकुशलता समझा जाये।
(३४) अधीनस्थ मजिस्ट्रेट को किसी भी सरकारी@अद्र्धसरकारी@गैर सरकारी कार्यालय के सर्वोच्च@अधीनस्थ अधिकारी@कर्मचारी की "सामान्य योग्यता भत्ता", "कार्य कुशलता भत्ता", "योग्यता भत्ता", "साहसिक भत्ता", रोक देने के शक्ति प्राप्त हो।
प्रस्ताव-७
जनशासन में जनता को भ्रष्टाचार से मुक्त रखने के लिए जनता को सशक्त बनाया जाना।
(३५) भारत का हर वयस्क नागरिक को जीवन में कम से कम एक बार शक्ति प्राप्त हो कि परिसीमा अधिनियम का पालन न करा पाने के दोषी जिलाधिकारी को सेवा मुक्त@पदावनति@दण्ड भत्ता को रोकने का दण्डादेश दे सके।
परन्तु उनके अधीनस्थ मजिस्ट्रेटो को नहीं।
(३६) जिलाधिकारी को स्वेच्छा से एक निश्चित सीमा में सशक्त व्यक्तिगत स्टाफ रखने की शक्ति प्राप्त हो, जिनके माध्यम से वह जिले के समस्त सरकारी@अर्धसरकारी@गैर सरकारी विभागों में परिसीमा अधिनियम का अनुपालन सुनिश्चित करा सके।
(३७) जिलाधिकारी, जिले की परिसीमा के अन्दर समस्त सरकारी@अर्धसरकारी@गैर सरकारी विभाग को शासन द्वारा निर्गत सम्बन्धित विधि का निश्चित समय सीमा के अन्दर अनुपालन करने हेतु बाध्य कर सके।
(३८) विधि के उल्लंघन की सूचना-आंदोलन का संज्ञान स्वयं जिलाधिकारी द्वारा लिया जाना सुनिश्चित किया जा सके।
(३९) जिलाधिकारी आंदोलन के संविधानिक@असंविधानिक होने की जॉंच करने के पश्चात ही यथोचित कार्यवाही करें।
(अ) संविधानिक आंदोलन :-वह मांगे@शिकायते जिनके लिए विधि विद्यमान है किन्तु संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों@अधिकारियों@कर्मचारियों द्वारा अनुपालन नहीं किया जा रहा है के विरूद्ध किया गया आंदोलन संविधानिक आंदोलन होगा।
(ब) असंविधानिक आंदोलन :-वह मॉंगे@शिकायते जिनके लिए विधि विद्यमान नहीं है किन्तु मानवीय दृष्टिकोण से उचित@अनुचित जान पड़ती है। असंविधानिक आंदोलन होगा, किन्तु भारतीय संविधान के अनुच्छेद १९ से शक्ति प्राप्त होगा।
(स) संविधानिक आंदोलन की दशा में एक व्यक्ति द्वारा किया गया आंदोलन का महत्व उतना ही होगा, जितना की एक समूह द्वारा किये गये आंदोलन का।
(द) संविधानिक आंदोलन के वही स्वरूप अनुमान्य हो, जैसाकि महात्मा गॉंधी जी के दर्शन में निहित रहा है।
इति।

अन्य प्रस्ताव जिन पर अध्ययन, मंथन और चिंतन जारी है निम्नवत है :-
(१) समाजवादी देश की शिक्षानीति क्या हो? शिक्षक का क्या कर्तव्य है?
(२) समाजवादी देश की न्याय प्रणाली क्या हो? न्यायाधीश का क्या कर्तव्य है।
(३) समाजवादी देश का लोक प्रशासन कैसा हो? लोक सेवको को क्या सिखाया जाये?
(४) समाजवादी देश का दण्ड अधिनियम क्या हो?
(५) अन्य कई अनुसुलझे प्रश्नों के उत्तर की तलाश जारी है।

इन समस्त विचारों का केन्द्र बिन्दु हमारी अपनी संस्था का कुप्रबन्धन रहा है। यदि वर्तमान कानून व्यवस्था के अनुसार निष्ठापूर्वक कार्यवाही की जाये, तो कई वरिष्ठ अधिकारी जेल जाने के अधिकारी है। मैं संस्था एवं जिला प्रशासन द्वारा अत्यधिक उत्पीड़ित किया जा चुका हWूं। उस वेदना को मैं इस पत्र में स्पष्ट नहीं कर सकता हWूं फिर भी आपकी संज्ञान में लाना चाहता हWूं कि मुझे सेवा में पुन: ससम्मान लिए जाने की प्रक्रिया जारी है। इसलिए सार्वजनिक रूप से मैं निवेदन करता हWूं, ऐसी व्यवस्था जिस पर एक शिक्षक ही न चल सके बदल दिये जाने योग्य है।

(कमलेश कुमार मित्रा)
पूर्व कार्यशाला अनुदेशक (शिक्षक)
इलेक्ट्रानिक विभाग
आई०ई०आर०टी० (प्रयाग) इलाहाबाद